39 साल पहले शिवसेना ने कांग्रेस का मुख्यमंत्री बनाने में मदद की थी, बाल ठाकरे ने आपातकाल का समर्थन किया था







  1. वैभव पुरंदरे की किताब 'बाल ठाकरे एंड द राइज ऑफ शिवसेना' में लिखा है कि शिवसेना की पहली चुनावी रैली में उस समय के बड़े कांग्रेस नेता रहे रामाराव अदिक भी शामिल हुए थे। रामाराव और ठाकरे पुराने दोस्त थे। किताब के मुताबिक, ठाकरे ने उस समय कांग्रेस-शिवसेना गठबंधन पर कहा भी था कि हम कम्युनिस्टों को हराने के लिए साथ आ रहे हैं। वहीं, अप्रैल 2004 में सुहास पालशीकर ने 'शिवसेना : अ टाइगर विथ मेनी फेसेस?' में इस बात का जिक्र किया है।


     




  2. कभी शिवसेना को वसंत-सेना भी कहा जाता था


     



    महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री वसंतराव नाईक के साथ बाल ठाकरे।


     


    राजनीतिक विश्लेषक उदय तानपाठक बताते हैं कि '1966 में बाल ठाकरे ने शिवसेना नाम से पार्टी बनाई थी और उनको महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री वसंतराव नाईक का समर्थन हासिल था, जिस वजह से शिवसेना को वसंत सेना कहा जाने लगा।' तानपाठक बताते हैं कि, '1971 में शिवसेना ने अपना पहला चुनाव के कामराज की कांग्रेस सिंडिकेट के साथ मिलकर लड़ा था। हालांकि, बाद में इंदिरा वाली कांग्रेस का गुट ही कांग्रेस के रूप में अस्तित्व में आया।'


     




  3. बाल ठाकरे का इमरजेंसी का खुलकर समर्थन किया


     



    इंदिरा गांधी के साथ बाल ठाकरे।


     


    'बाल ठाकरे एंड द राइज ऑफ शिवसेना' में लिखा है कि बाल ठाकरे ही ऐसे नेता थे, जिन्होंने खुलकर इमरजेंसी का समर्थन किया था। ठाकरे तो यह तक कहते थे कि मैं लोकशाही नहीं, बल्कि ठोकशाही पर विश्वास करता हूं। थॉमस हेनसेन की लिखी किताब 'वेजेस ऑफ वायलेंस : नेमिंग एंड आइडेंटिटी इन पोस्टकोलोनियल बॉम्बे' के मुताबिक, ठाकरे ने आपातकाल का समर्थन करते हुए कहा था कि इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल इसलिए लगाया, क्योंकि देश में फैली अस्थिरता से निपटने का यही एकमात्र उपाय है।


     




  4. कांग्रेस का मुख्यमंत्री बने, इसके लिए शिवसेना ने उम्मीदवार नहीं उतारे


     



    1981 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एआर अंतुले के साथ एक रैली में बाल ठाकरे।


     


    वैभव पुरंदरे की किताब के अनुसार, 1977 में बालासाहेब ने बीएमसी चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मुरली देवड़ा का समर्थन किया था। उसी साल हुए आम चुनाव में शिवसैनिकों ने कांग्रेस का प्रचार किया था। 1980 में इंदिरा गांधी ने प्रधानमंत्री बनते ही महाराष्ट्र की सरकार को बर्खास्त कर दिया और यहां दोबारा चुनाव कराए। इन चुनावों में कांग्रेस ने अब्दुल रहमान अंतुले को मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाया था। अंतुले और ठाकरे अच्छे दोस्त थे। इसलिए ठाकरे ने चुनाव में अपने उम्मीदवार नहीं उतारे और कांग्रेस का समर्थन किया।


     




  5. 2007 और 2012 के राष्ट्रपति चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन किया


     





     


    शिवसेना और कांग्रेस की दोस्ती राष्ट्रपति चुनाव में भी साथ दिख चुकी है। 2007 में शिवसेना ने एनडीए समर्थित भैरो सिंह शेखावत की जगह यूपीए की उम्मीदवार प्रतिभा पाटिल का समर्थन किया। इसी तरह से 2012 के राष्ट्रपति चुनाव में शिवसेना ने यूपीए के प्रणब मुखर्जी का समर्थन किया था। राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद प्रणब मुखर्जी बाल ठाकरे से मिलने उनके घर मातोश्री भी गए थे।


     







 


बाल ठाकरे के न सिर्फ कांग्रेस, बल्कि शरद पवार से भी अच्छे संबंध रहे हैं। पवार से तो उनकी दोस्ती इतनी थी कि ठाकरे ने उनकी बेटी सुप्रिया सुले के खिलाफ अपना उम्मीदवार भी नहीं उतारा था। दरअसल, सितंबर 2006 में शरद पवार की बेटी सुप्रिया ने राज्यसभा चुनाव लड़ने की घोषणा की। शरद पवार ने अपनी आत्मकथा 'ऑन माई टर्म्स' में लिखा है- बाल ठाकरे ने उन्हें फोन किया और बोले "मैं सुन रहा हूं कि सुप्रिया चुनाव लड़ने जा रही है और आपने मुझे बताया नहीं। मुझे यह खबर दूसरों से क्यों मिल रही है?" इस पर पवार ने उनसे कहा "शिवसेना-भाजपा गठबंधन ने पहले ही उसके (सुप्रिया) खिलाफ अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी है"। इसके बाद ठाकरे ने उनसे कहा "मेरा कोई भी उम्मीदवार सुप्रिया के खिलाफ नहीं लड़ेगा। तुम्हारी बेटी, मेरी बेटी है।" तो पवार ने कहा- "भाजपा का क्या करेंगे?" उन्होंने जवाब दिया- "कमलाबाई (भाजपा) की चिंता मत करो। वो वही करेगी, जो मैं कहूंगा।"







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